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Wednesday, 3 June 2015

कनक्वे मिललू हम तें रोजगार

                 

 कनक्वे मिललू हम तें रोजगार ।
 यू ही सवाल च मन मा बार बार ।
 किलै नी होणा हम पहाड जाणक तैयार ।
 जख ठंडू ठंडू बांझे की जेडियों कु पाणी ।
 जख हरी भरी सार ।
  छोडा ना तुम पहाड तें अभी भी समझी जावादों ।
 जब जाण आखिर पहाड च ये पहाड छोडिक ना  आवा दों ।
 समझा रोंत्याला पहाड की कीमत अफु तें समझावा दों ।
 ना छोडा  मेरा पहाड मेरा पहाड आवा दों ।
 कैन बोली की हम दिल्ली देहरादूण बस्यां छन ।
  हम तें पते च कनि नखरी आफत मां फंस्याछन ।





  

Tuesday, 26 May 2015

जेटा कू घाम



                 जेटा का घाम मा

आजकल जेटा का घाम मा
तु जाई होली प्यारी फुवगडियों का काम मा ।
यख बिजली कब जांदी कुछ पता नी हम लरक तरक होंया
पसीना सी जेटा का घाम मा ।
होली जो गेहूं छेणी लगी होली काममा ।
तु बिचारी प्यणी होली बांझ बूरांश की जेडियों कु ठण्डू पाणी।
यख त पेपसी कोका कोला लगणु जनू कल्चवाणी ।
ये पापी प्रदेश की खैर प्यारी कैमा लाणी ।
तेला घाम मा प्यारी यखुली रै ना ।
आजकल आछरियों का परा दिन दोपरा मा यखुलु जैना ।
मेरी फिकर न  मुखडी कु रंग सुखे ना ।
घास पातक बणो यखुली जै ना ।




में ते मनखि होणकु खेद च


में ते मनखि होणकु खेद च ।
मेतें ये जमाना मा मनखि होण कु खेद च।

भाई भाई मा मत भेद च ।
मामवता कू बस नारु च ।

एक हेका देखिक फूक्यणु जुकडू हमारु च ।
मनखि मनखि आपस मा लडणा तब बोना भगवान कू सारु च ।

मंदिरों मा हम भगवान खुजाणा छन ।
रोज पडोसीयों दगडी तुतु में में होणी घर मा शांति पाठ कराणा च ।
दिल मा नफरत अर घर मा घ्यू का दिवा जगाणा च ।
ब्वे बाबू पाणी क तरसदा ढुगों तें दूध पीलाणा छन ।

 

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