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Wednesday, 3 June 2015

कनक्वे मिललू हम तें रोजगार

                 

 कनक्वे मिललू हम तें रोजगार ।
 यू ही सवाल च मन मा बार बार ।
 किलै नी होणा हम पहाड जाणक तैयार ।
 जख ठंडू ठंडू बांझे की जेडियों कु पाणी ।
 जख हरी भरी सार ।
  छोडा ना तुम पहाड तें अभी भी समझी जावादों ।
 जब जाण आखिर पहाड च ये पहाड छोडिक ना  आवा दों ।
 समझा रोंत्याला पहाड की कीमत अफु तें समझावा दों ।
 ना छोडा  मेरा पहाड मेरा पहाड आवा दों ।
 कैन बोली की हम दिल्ली देहरादूण बस्यां छन ।
  हम तें पते च कनि नखरी आफत मां फंस्याछन ।





  

 

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